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एचपीसीएल के बारे में जानकारी

एचपीसीएल एक महारत्न सीपीएसई और एक फोर्ब्स 2000 कंपनी है। इसे भारतीय कंपनी अधिनियम 1913 के तहत एक कंपनी के रूप में मूल रूप से निगमित किया गया था। इसका सीआईएन नं. L23201MH1952GOI008858 है।.

यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), भारत में सूचीबद्ध है।

एचपीसीएल के पास 2 प्रमुख रिफाइनरियाँ हैं, जिसमें से एक मुंबई (वेस्ट कोस्ट) में स्थित है, जिसमें पेट्रोलियम ईंधन और विशिष्ट ऑयलों की एक विस्तृत विविधता का उत्पादन किया जाता है। इसकी क्षमता 7.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) है, तथा दूसरी रिफाइनरी विशाखापटनम (ईस्ट कोस्ट) में स्थित है, जिसकी क्षमता 8.3 एमएमटीपीए है। एचपीसीएल अंतरराष्ट्रीय मानकों के ल्यूब बेस ऑयलों का उत्पादन करने वाली कंपनी है, जिसके पास देश के सबसे बड़ी ल्यूब रिफाइनरी का स्वामित्व है और वह इसका संचालन भी करती है, जिसकी क्षमता 428 टीएमटी है। इस ल्यूब रिफाइनरी में भारत के कुल ल्यूब बेस ऑयल उत्पादन का 40% से अधिक तैयार किया जाता है।

एचपीसीएल मेसर्स मित्तल एनर्जी इन्वेस्टमेंट प्रा.लि. के सहयोग से बठिंडा में 48.99% इक्विटी के साथ 11.3 एमएमटीपीए क्षमतावाली रिफाइनरी का संचालन करता है तथा साथ ही इसकी 15 एमएमटीपीए वाले मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) में लगभग 16.95% की इक्विटी है।

एचपीसीएल के पास भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए उत्पाद पाइपलाइनों का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है, जो 3370 किलोमीटर से अधिक की पाइपलाइन नेटवर्क में फैला है, तथा साथ ही प्रमुख शहरों में इसके 14 जोनल कार्यालय और 128 क्षेत्रीय कार्यालयों का नेटवर्क है, जो टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क, एविएशन सर्विस स्टेशन, एलपीजी बॉटलिंग प्लांट, इनलैंड रिले डिपो और रिटेल आउटलेट्स, ल्यूब और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरीशिप सहित सप्लाई और डिस्ट्रिब्यूशन इन्फ्रास्ट्रक्चर से सुविधायुक्त हैं।

पूरे भारत भर में, इसके विभिन्न शोधन और विपणन स्थानों पर कार्यरत 10,500 से अधिक कर्मचारियों का अति उच्च कार्यबल द्वारा लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन संभव बना हुआ है।

एचपीसीएल विभिन्न विकासों और गतिविधियों के माध्यम से सतत विकास के आर्थिक, पारिस्थितिक और सामाजिक उत्तरदायीपूर्ण उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। एचपीसीएल बाल देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, कौशल विकास और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है, क्योंकि ये समाज के कमजोर वर्ग के जीवन को छूते हैं।